दुबई में ऑयल टैंकर पर ड्रोन हमला: तेल रिसाव से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

दुबई के जेबेल अली बंदरगाह पर कुवैती ऑयल टैंकर “अल सालमी” पर हुए कथित ड्रोन हमले ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस टैंकर में करीब 20 लाख बैरल कच्चा तेल मौजूद था। हमले के बाद आग पर काबू पा लिया गया, लेकिन संभावित तेल रिसाव को लेकर पर्यावरण और स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि हमला ईरान से जुड़े ड्रोन द्वारा किया गया, हालांकि इस दावे को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स सामने आ रही हैं। घटना के बाद एशियाई बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 2% की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो इस तनाव के आर्थिक असर को भी दर्शाता है।
तेल रिसाव क्यों है खतरनाक?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समुद्र में तेल रिसाव होता है, तो उसका असर कई स्तरों पर पड़ता है। गर्म पानी वाले क्षेत्रों जैसे फारस की खाड़ी में कच्चा तेल तेजी से फैलता है और पानी की सतह पर एक पतली परत बना देता है। इससे समुद्री जीवन को सांस लेने में दिक्कत होती है और ऑक्सीजन की कमी पैदा हो सकती है।
तेल का कुछ हिस्सा 24–48 घंटों में वाष्प बनकर हवा में मिल जाता है, जिससे वायुमंडल में जहरीले कार्बनिक यौगिक फैलते हैं। इसका सीधा असर आसपास रहने वाले लोगों की सेहत पर पड़ता है, जिससे सांस संबंधी बीमारियां और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।
समुद्री जीवों पर असर
तेल रिसाव समुद्री जीवों के लिए बेहद घातक होता है। यह पक्षियों के पंखों पर जमकर उन्हें उड़ने में अक्षम बना देता है, जबकि मछलियों और अन्य जीवों के शरीर में जाकर उनके अंगों को नुकसान पहुंचाता है। तेल में मौजूद विषैले तत्व उनके इम्यून सिस्टम को कमजोर करते हैं और कई बार उनकी मौत का कारण भी बनते हैं।
सफाई और जिम्मेदारी
अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुसार, तेल रिसाव की जिम्मेदारी संबंधित कंपनी या पक्ष पर होती है। उन्हें न केवल सफाई का खर्च उठाना पड़ता है, बल्कि पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन कर उसकी भरपाई भी करनी होती है। इस प्रक्रिया को ‘नेचुरल रिसोर्स डैमेज असेसमेंट’ (NRDA) कहा जाता है।
दुबई में टैंकर पर हुआ यह हमला केवल एक सुरक्षा मुद्दा नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संकट का संकेत भी है। यदि तेल रिसाव होता है, तो इसका असर लंबे समय तक समुद्री पारिस्थितिकी, मानव स्वास्थ्य और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में इस स्थिति पर नजर रखना और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।